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उलझन कुछ भी समझ ना आई, एक सिरे पर ख्वाहिश थी, और ...

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हिम-सा शीतल,नीर-सा चंचल   कनक-कलेवर, मधुमीठा - सा, चाँद  से  उजले चंदन तन पर प्रेम   गीत   मैंने   लिखा  था. प्रथम   प्रीत   का  था  स्पंदन सुधबुध का भी भान कहाँ था , सहज  धधक,उद्वेलन  मन में और  कोई  अरमान  कहाँ था.  कुमकुम- सा कोमल आकर्षण सुमन-सुगंध -सा वो आलिंगन, चाँदी  जैसे   उजले  दिन   वो हर  पल चमका कुंदन - कुंदन. स्वप्न  प्रवाह  सबल  ऐसा   था जीवन  में   संबल   जैसा   था, धरती  पर  ना  उतर  सका  वो व्योम - प्रवाही    गंगाजल  था. प्रेम    कहानी    ऐसी     उलझी उलझन कुछ भी समझ नाआई, एक   सिरे   पर   ख्वाहिश   थी और  दूजी ओर खड़ी रुसवाई.  रिश्ता  कच्चा  ही था  लेकिन गाँठ    प्रबलतम    जोड़   गया, जाते  ...

#हो_सकता_है... कल मैं न रहूँ...

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  #हो_सकता_है          कल मैं न रहूँ पर तुम उदास न होना, झरोखे से अंबर को देखना और अपनी सूनी आँखो को टिका देना सबसे चमकीले तारे पर, हाँ ध्रुवतारे पर उसी की मांनिद स्थिर अचल रहूँगा तुम्हारे अंतर्मन में ! हो_सकता_है... कल मैं न रहूँ तुम निराश न होना सुनना तुम देवालय से आती प्रार्थना की सुर लहरियाँ उनकी गूँज सदृश गुंजायमान रहूंगा मैं तुम्हारे मन मंदिर में सदैव ! हो_सकता_है कल मैं न रहूँ तुम परेशां न होना पढ़ना महान कवियों का कविता संग्रह प्रत्येक कविता के शब्दों में मिलूंगा, 'मैं'भाव विभोर करता हुआ तुम्हे !! सुनो...विछोह हो_सकता_है , सरीखी सम्भावनाओं को विराम दे ही देना...तुम , तुम्हारे इर्द गिर्द मैं ही मिलूंगा हमेशा-हमेशा !!

आशिक़ाना हो जाता है ...!

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खुदा जान कब ये दिल दीवाना हो जाता  है छोटी सी बात का अफसाना हो जाता  है कडी धूप में खडे थे हम ना जाने कब से  !! तेरी याद आते ही मौसम सुहाना हो जाता है कुछ तो बात है तेरी हर एक बात में जाना...!!! तेरे ज़िकर से मेरा हर लफ्ज़ आशिक़ाना हो जाता है ...!!!

पायल की झंकार

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हम पायल की झंकार सुनने के लिए बेताब हैं..!! . और उनको आदत है धीरे चलने की...!!!

उसे कहते हैं बिटिया

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आज बेटी दिवस भी है -बधाई*   ---------------- मेहंदी रोली कंगन का सिँगार नही होता''' रक्षा बँधन भईया दूज का त्योहार नहीं होता'''' रह जाते है वो घर सूने आँगन बन कर'''' जिस घर मे बेटियों का अवतार नहीं होता''' जन्म देने के लिए माँ चाहिये, राखी बाँधने के लिए बहन चाहिये, कहानी सुनाने के लिए दादी चाहिये, जिद पूरी करने के लिए मौसी चाहिए, खीर खिलाने के लिए मामी चाहये, साथ निभाने के लिए पत्नी चाहिये, पर यह सभी रिश्ते निभाने के लिए बेटियां तो जिन्दा रहनी चाहये

दिल के किसी कोने में

थोड़ी सी जगह दे दो दिल के किसी कोने में!! मेरी हैसियत नहीं है पूरा दिल सँभालने की... *खुदा को याद करूँ  या याद करूँ *तुम्हे..* *ज़र्रे-ज़र्रे में वो है और कतरे-कतरे में *तुम...!!

ख्वाबों मे आ जाना

आज दिल ने तेरे दीदार की ख्वाहिश रखी है, मिले अगर फुरसत तो ख्वाबों मे आ जाना।

बरस जाओ किसी दिन

चेहरे पे मेरे ज़ुलफ को फैलाओ किसी दिन, क्या रोज़ गरजते हो बरस जाओ किसी दिन, खुश्बू की तरह गुज़रो मेरे दिल की गली से, फूलों की तरह मुझ पे बिखर जाओ किसी दिन...

सिलसिला भी क्या अजीब है

खुशिंयाँ मांगी थी उस खुद़ा से अपने लिये और देखो न मुझे तुम मिल_गये उसकी मुहब्बत का सिलसिला भी क्या अजीब है, अपना भी नहीं बनाती और किसी का होने भी नहीं देती....

"लफ़्ज़" "आईने" हैं

"लफ़्ज़" "आईने" हैं मत इन्हें "उछाल" के चल, "अदब" की "राह" मिली है तो "देखभाल" के चल मिली है "ज़िन्दगी" तुझे इसी ही "मकसद" से, "सँभाल" "खुद" को भी और "औरों" को "सँभाल" के चल..!!