उसे कहते हैं बिटिया
आज बेटी दिवस भी है -बधाई* ---------------- मेहंदी रोली कंगन का सिँगार नही होता''' रक्षा बँधन भईया दूज का त्योहार नहीं होता'''' रह जाते है वो घर सूने आँगन बन कर'''' जिस घर मे बेटियों का अवतार नहीं होता''' जन्म देने के लिए माँ चाहिये, राखी बाँधने के लिए बहन चाहिये, कहानी सुनाने के लिए दादी चाहिये, जिद पूरी करने के लिए मौसी चाहिए, खीर खिलाने के लिए मामी चाहये, साथ निभाने के लिए पत्नी चाहिये, पर यह सभी रिश्ते निभाने के लिए बेटियां तो जिन्दा रहनी चाहये

