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वो लफ्ज था.......इश्क !

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"इश्क"
मंन उदास था,
सोचा चलो आज,
इश्क के बारे कुछ लिखा जाऐ।
कागज और कलम उठाई,
बेठ गये लिखने।
लाख कोशिश की,
मगर,
कुछ भी लिख ना पाऐ।
जानें क्या हुआ आज,
लफ्ज और ख्यालो में,
ताल-मेल बिठा ना पाऐ।
हार कर कलम वापस
मेज पर रख दी,
मगर,
लिखने की चाह को
ज़ेहन से निकाल ना पाऐ
दफ़तन,
कलम और दवात सिहायी की,
फर्श पर गिरी
और हम संभाल ना पाऐ। देख,
बिखरी सिहायी और कलम को,
आँखे भर आई।
और,
अशको को बहने से रोक ना पाऐ।
बिखरी सिहायी और अशक
दोनो आपस में घुल-मिल गये।
फर्श पर,
इक धुंधली सी तस्वीर उभर आई।
क्या थी वो तस्वीर,
कुछ संमझ ना पाये।
ग़ोर से,
जब फर्श को देखा।
शायद,
इक लफ्ज उभर कर आया था।
वो लफ्ज था.......,,,,,,,,”इश्क !

खामोशी का साया है...

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हर तरफ खामोशी का साया है...

जिसे देखो वो ही पराया है...

गिर पड़ा हु मोहोब्बत की भूख से...

और लोग कहते है पीकर आया है...
Har taraf khaamoshee ka saaya hai...

Jise dekho vo hee paraaya hai...

Gir pada hu mohobbat kee bhookh se...

Aur log kahate hai peekar aaya hai...

नाम तेरा चाहता हूँ...

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हर नज़र से पहले दीदार तेरा चाहता हूँ...

हर राह से पहले सफर तेरा चाहता हूँ...

ना मिले चाहे मंज़िल मुझे कोई...

मेरे नाम से पहले नाम तेरा चाहता हूँ...
Har nazar se pahale deedaar tera chaahata hoon...

Har raah se pahale saphar tera chaahata hoon...

Naa mile chaahe manzil mujhe koi...

Mere naam se pahale naam tera chaahata hoon...

तेरा साथ है तो, मुझे क्या कमी है,

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तेरा साथ है तो, मुझे क्या कमी है,
अंधेरो से भी, मिल रही रोशनी है...
कुछ भी नही है तो, कोइ गम नही है,
हए एक बेबसी, बन गयी चांदनी है....

टूटी है कश्ती, तेज है धारा
कभी ना कभी तो, मिलेगा किनारा
बही जा रही, ये समय की नदी है
इसे पार करने की आशा जगी है
हर इक मुश्किल सरल लग रही है
मुझे झोपडी भी महल लग रही है
इन आखो मे माना, नमी ही नमी है
मगर इस नमी पर ही दुनिया थमी है

मेरे साथ तुम मुस्कुरा के तो देखो
उदासी का बादल हटा के तो देखो
कभी है ये आंसू, कभी ये हसी है
मेरे हमसफ़र, बस यही जिन्दगी है...

सीखा है जीने का सलीका...

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ये लकीरें, ये नसीब, ये किस्मत सब फ़रेब के आईनें हैं,
हाथों में तेरा हाथ होने से ही मुकम्मल ज़िंदगी के मायने हैं!
💞
मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीका,
 चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना !

बुझे लबों पे तबस्सुम के गुल सजाता हुआ

महक उठा हूँ मैं तुझ को ग़ज़ल में लाता हुआ

मुस्कान के भी कुछ उसूल
होते हैं
हर किसी के नाम पर नहीं
मुस्कुराते हम.....

अच्छी लगती है मुझे वो तेरी मुस्कान..

जो मुझे परेशान करने के बाद आती है तेरे चेहरे पर..!!

ना समेट सकोगे कयामत तक जिसे तुम,
कसम तुम्हारी तुम्हें इतनी मुहब्बत करते हैं…


लो कर ली मोहब्बत ....

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सगंमरमर की तारीफ ना कर मुझसे ,

तु कहे तो आँसुओ से मोहब्बत लिख दुँ ,

चुमने के लिए झुक जायेगा ताजमहल भी ,

जीस जमीँ पर तेरा नाम लिख दुँ...

भीगे गुलाब जैसी खूबसूरत हो तुम

जो भी हो जाना मेरी महोब्बत हो तुम

लो कर ली मोहब्बत .... एक बार फिर तन्हाइयों से,

झूठ कहते है लोग की .... मोहब्बत दुबारा नहीं होती!!
sagammaramar kee taareeph na kar mujhase ,



tu kahe to aansuo se mohabbat likh dun ,



chumane ke lie jhuk jaayega taajamahal bhee ,



jees jameen par tera naam likh dun...



bheege gulaab jaisee khoobasoorat ho tum



jo bhee ho jaana meree mahobbat ho tum



lo kar lee mohabbat .... ek baar phir tanhaiyon se,



jhooth kahate hai log kee .... mohabbat dubaara nahin hotee!!



तेरी चाहत का सिलसला नही जायेगा ....

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रात भी गुजर जाएगी ...
और  दिन भी आयेगा ...

पर  मेरे दिल से कभी तेरी चाहत  का सिलसला नही जायेगा ....

तुम य़ाद  हो तो भूल भी जाऊ ....

पर  मेरी रुह  से तेरा रंग कैसे उतर पायेगा ...

मोहब्बत जिसका जवाब हो मुझे ऐसा सवाल बनना है

तेरे दिलो दिमाग पर छाया रहे जो मुझे वो ख्याल बनना हे...

महक रहे हैं फिज़ाओं में बेहिसाब से हम....

क़रीब आ के तुम्हारे हो गये गुलाब से हम.......

अधूरे से रहते मेरे लफ्ज़ तेरे ज़िक्र के बिना…!

मानो जैसे मेरी हर शायरी की रूह तुम ही हो…!
raat bhee gujar jaegee ...



aur din bhee aayega ...



par mere dil se kabhee teree chaahat ka silasala nahee jaayega ....



tum yaad ho to bhool bhee jaoo ....



par meree ruh se tera rang kaise utar paayega ...



mohabbat jisaka javaab ho mujhe aisa savaal banana hai



tere dilo dimaag par chhaaya rahe jo mujhe vo khyaal banana he...



mahak rahe hain phizaon mein behisaab se ham....



qareeb aa ke tumhaare ho gaye gulaab se ham.......



adhoore se rahate mere laphz tere zikr ke bina…!



maano jaise meree har shaayaree kee rooh tum hee ho…!
The night will…